मंगलवार, 23 दिसंबर 2014

हाँ सिर्फ यहाँ बदबू और जूता ही रह जायेगा।

             कल pk देखी। और उसके बाद फेसबुक पर अजीब अजीब कमेंट देख रहा हूँ। यही जरुरी था कि मेरे भारत में धार्मिक कट्टरता से पनपी वहशीपन को किसी दूसरे ग्रह से आया pk ही बताये तो बेहतर वरना कोई यहाँ का वाशिंदा बताये तो उसे लात घूंसे तो पड़े-पड़े साथ में हवालात और जायेगा। pk धरती को गोला कहता है। अंतरिक्ष में तैरते अनगिनत गोलों में से एक छोटा सा गोला। एक छोटा सा गोला ताकि मज़हब और मुल्क की सीमाओं के बीच घिरे हम और आप अपने  नज़रिये का विस्तार कर सकें। हम एक बार बाहर से धरती को देख सकें कि हमने इसके बाशिंदों को किस कदर बांट दिया है।  आज चारों तरफ धर्मांतरण, धार्मिक  संकीर्णता और धार्मिक कट्टरता के बयान  सुनाई दे रहे हैं। राजनीतिक सत्ता के दम पर धार्मिक संगठन ग़ैर संवैधानिक बातें बोल रहे  हैं। मुझे तो नहीं लगता कि उनकी बातों में इंसानियत और अपनेपन की बातें हैं.
            pk पूरी फ़िल्म में हंसाता है तो कुछ उल जलूल सवालों से दकियानूसी समाज की पोल भी खोलता है। अभी फेसबुक और whatsapp पर कई तरह के मेसेज आएं हैं कि इस मूवी में हिन्दू धर्म को ही क्यों टारगेट किया है। वैसे आजकल अधिकतर लोग धर्म की गॉसिप से अलग ही रहना पसंद करते हैं सिवाय कुछेक बुद्धिजीवी लोगो के। pk भगवान के पास रिमोट के चक्कर में घनचक्कर बनता है। और मंदिरो मस्ज़िदों के बाहर 10 रुपये में बिकने वाले भगवानो के जंजाल में फंस जाता है। आज के समाज में एक अलग ही तरह की प्रवृति नज़र आ रही है। हर समस्या का हल धर्म से जोड़ दिया जा रहा है। हर तरफ कट्टरता का माहौल बना हुआ है। और उस पर  और भी गजब है की धर्म परिवर्तन भी हो रहा है। (ओह्ह माफ़ करना इसे घर वापसी कहते हैं)
            इतिहास का विद्यार्थी रहा हूँ और सबसे पसंदीदा विषय भी रहा है। अपने कॉलेज के दिनो में दिल्ली के पहाड़गंज की रामकृष्ण मिशन लाइब्रेरी में मेरी कई शामें राम और कृष्ण को ढूँढने में बीती  लेकिन किसी भी इतिहासकार ने उनका ज़िक्र अपनी किताबों में नहीं किया. किसी भी समाज में जब तक धर्म आचरण तक सीमित रहता है तब तक जीवन सुरम्य रहता है और यही सुरम्यता किसी भी धर्म की उच्च पराकाष्ठा  है। लेकिन जब वह राजनीति की गलियारों में जाता है तो वहीँ से धर्म के साथ कट्टरता जुड़ जाती है।  मैं जन्म से हिन्दू हूँ और बचपन से उसी माहौल में जिया हूँ, वो मेरे वजूद में है। मैं किसी भी लालच में वो नहीं छोड़ सकता और मुझसे छूटेगा ही नहीं। आज सारे विश्व का माहौल धर्म और खुद को उच्च साबित करने पर ख़राब है।
                   वैदिक काल में धर्म की उच्च पराकाष्ठा इसलिए थी कि तब धर्म आचरण में था। तब धर्म जन्म आधारित न बल्कि कर्म आधारित था और वेदों में जाति का आधार कर्म ही था। लेकिन जैसे ही धर्म ने राजनीति में प्रवेश किया (उत्तर वैदिक काल) वैसे ही वैदिक धर्म जन्म आधारित बन गया। वेदों में लिखे उच्चकोटि के ज्ञान को उत्तरवैदिक के पुरोहित वर्ग ने अपने हिसाब से लिखना शुरू कर दिया और राजा को धार्मिक आडम्बर (जिसे pk Wrong नंबर बोलता है) के नाम पर डराया जाने लगा और यहीं से अनेक प्रकार के यज्ञों का उदय हुआ। इन्ही आडंबरों के कारण महात्मा बुद्ध इतनी प्रसिद्धि पा गए। बुद्ध ने थोडा ज्ञान और थोड़ी अक्लमंदी से वैदिक धर्म की अच्छी बातों को बौद्ध धर्म में डाला और बौद्ध धर्म को पूरे एशिया में प्रसारित किया और हम भारत की सीमा तक ही सीमित रह गए। महिलाओं और निम्न वर्ग की दयनीय स्तिथि इसी काल से प्रारम्भ हुई और आज तक विद्यमान है। हमारे देश के महान् कवि तुलसीदास तो कह गए हैं कि- ढोर, गंवार, शुद्र, पशु, नारी..ये सब ताड़न के अधिकारी। यानी तुलसी दास के मुताबिक समाज में नारी और निम्न वर्ग जानवर के समान है और उसको प्रताडित करना चाहिए।
              मेरे देश में  कई लोग भगवान राम को आदर्श मानते हैं और वो ये भी जानते हैं कि भगवान राम ने अपना पूरा जीवन मानवता और सौहार्द में लगाया। धर्म मानवता लाता है, सहिष्णुता लाता है। कुछ दिन पहले पेशावर के स्कूल में तालिबान ने मासूम बच्चों को गोलियों से भूना। क्या कुसूर था उनका?। लेकिन मेरे मानवप्रेमी दोस्त इन्हें सपोले कह के पुकार रहे कि सौ सपोले क्या मरे कैंडल लेकर निकल चले। इतना गुस्सा क्यों है भाई ? । अगर यही सब चलता रहा तो यकीन माने कुछ समय बाद कोई किसी के लिए आवाज नहीं उठाएगा। अब शहरों कस्बों के नामों के आधार पर मानसिकता बनती है। और सबसे ज्यादा दयनीय स्तिथि यह है कि अबके जो पीढ़ी है उसमे ये धार्मिक कट्टरता ज्यादा पनप रही है। जिस तरह हम मानते हैं कि पाकिस्तान में बच्चों का ब्रेनवाश किया जाता है तो मैं यकीन से कहता हूँ कि यहाँ भी वही स्तिथि बन रही है।
              अब फिर से pk पर आता हूँ। कई लोगो के सवाल हैं कि राजकुमार हिरानी ने हिन्दू धर्म को ही क्यों टारगेट किया तो मेरी समझ से इसे इस तरह परिभाषित कर सकते हैं कि भारत एक हिन्दु बहुल राष्ट्र है (हिंदुस्तान लिखता तो ज्यादा वजनदार लगता! हैं ना?)  तो बात उसी की सुनी जाती है जो बहुमत में होता है। आज धर्म के नाम पर कई आसारामों कई रामपालों की दुकानें मासाल्लाह बेहतरीन चल रही हैं। अब तो टीवी भी उबासियों की दहलीज पार कर चुका है। हर न्यूज़ चैनल हर म्यूजिक चैनल सब के सब किसी न किसी ताबीज को बेचे जा रहा है। और pk  इसीलिए कह गया कि भगवान से डराया जा रहा है। wrong नंबर से दुनिया चल रही है और कुछ विशेष वर्ग इसी डर से अपना चूल्हा जलाता है।
              हम धार्मिक कट्टरता और  राष्ट्रवाद को ही शर्बत में चीनी की तरह घोलकर पीये जा रहे हैं बगैर यह समझे कि कट्टरता की यही पृष्ठभूमि काम आ  जाती है आतंकवाद को रचने में।   बहरहाल  PK की पूरी पटकथा इस मुद्दे पर है कि अभी भी समय है, हम सुधर जाएँ वर्ना एक दिन इस गोले में लाशों की बदबू और जूते के सिवा कुछ न बचेगा।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

" अनकहा सा कुछ ..." ________________________________________   2001 अगस्त माह की एक सुबह , बाहर बारिश हो रही थी , लेकिन आसमान...