मंगलवार, 7 अक्टूबर 2014

नैनीताल की सैर

आदरणीय
रावत जी,
मुख्यमंत्री, उत्तराखंड।
नमस्कार मुख्यमंत्री महोदय। आशा करता हूँ कि आप स्वस्थ होंगे, लेकिन टीवी पर अभी भी आपके गले की पट्टी देखकर मेरी आशा निराशा में बदल जाती है। सर्वप्रथम अपने अमूल्य शरीर की रक्षा करना अन्य कार्य बाद में होंगे।
मुख्यमंत्री जी मैं विगत कुछ दिनों से परिवार के साथ नैनीताल की सैर पर था। सोचा था कि अक्टूबर माह की खुशनसीबी (5 दिन की लगातार सरकारी छुट्टी) को आराम से नैनीताल की हसीन वादियों में जिऊंगा। लेकिन पूरा नैनीताल गाड़ियों के बवंडर और सैलानियों के सैलाब से अटा पड़ा था। रावत जी मैंने तल्लीताल से UGC तक 2 किलोमीटर के सफर को डेढ़ घंटे में तय किया। और यकीन मानिये उस डेढ़ घंटे के सफ़र में मैंने खुद को 150 बार कोसा होगा कि क्यूँ आया। टैक्सी वाला कह रहा था कि साहब हम तो कभी नहीं चाहते की यहाँ सीजन आये। सीजन से ज्यादा कमाई तो ऑफ सीजन में होती है। इस ट्रैफिक जाम में उतनी कमाई नहीं होती जितने का पेट्रोल खप जाता है और दिन में मुश्किल से दो चक्कर लगा पाते हैं।
फिर मैंने सोचा की चलो थोड़ी देर की बात होगी पर सारी पुलिस मुस्तैद पर मजाल क्या कि जाम से मुक्ति मिली हो। जैसे तैसे गेस्ट हाउस पहुंचे तो सोचा कि थोड़ी देर आराम करके निकलेंगे तो जाम कम हो जायेगा। फिर हम 1 बजे माल रोड से टैक्सी से कई सारी जगह गए। मसलन खुरपा ताल, बारा पत्थर, zoo, हिमालय दर्शन आदि आदि, पर हर जगह हमें गाड़ियों का रैला मिला और हर जगह लगे जाम ने हमें शारीरिक व मानसिक थकान से जुझाये रखा। चिंता न करे इस बात के कुसूरवार आप नहीं हैं, क्या करूँ राजीतिक विज्ञान का विद्यार्थी रहा हूँ तो आपकी राजनितिक मजबूरियों को  भी समझता हूँ। (कमबख्त ये राजनीति भी ना.....)
रावत जी मैंने नैनीताल में हर एक अव्यवस्था में खामी पाई। (माफ़ करें व्यवस्था कुछ भी नहीं थी इसलिए अव्यवस्था शब्द का प्रयोग किया) मैं अपने दो दिन के पड़ाव में बस कमियों को देखता रहा और उनके समाधान खोजने की कोशिश करता रहा। मुझे नैनीताल शहर की खूबसूरती भायी लेकिन उसे सहेजने की मंशा प्रशासन की तरफ से नज़र नहीं आई।
मुझे नैनीताल की सबसे बड़ी समस्या वाहनो की अन्धाधुन्ध संख्या और पार्किंग की कमी और टैक्सियों का अव्यवस्थित संचालन है।
इन उपरोक्त कमियों हेतु मेरी और से निम्न सुझावों को इस आशा के साथ आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ कि आप बिना राजनीतिक विश्लेषण करते हुए इन पर तनिक गौर फरमाएंगे।
सर्वप्रथम पूरे नैनीताल शहर को सामान्य यातायात के साथ चलाना है तो वाहनों की गिनती कम करनी होगी। इसके लिए यह कदम उचित हो सकता है कि बाहरी वाहनों को शहर के बीचोंबीच बने मैदान में पार्क कराया जाये। मैं तो नगर निगम सामने बने चबूतरे से गाड़ियों की गिनतियों का अंदाजा ले रहा था तो मुझे उम्मीद है कि कम से कम 2000 वाहन वहां पक्का पार्क हो जायेंगें जिससे पार्किंग से राजस्व की भी प्राप्ति हो सकती (वैसे मैं नहीं जानता कि उस मैदान पर गाड़ियों की पार्किंग करने में क्या दिक्कते हैं) फिर वही पर एक काउंटर हो जहाँ से सैलानी भिन्न भिन्न दर्शनीय स्थलों के लिए टैक्सी की पर्ची कटाएँ और नैनीताल की सैर करें। भिन्न भिन्न स्थानों के लिए अलग पैकेज हों जिसमे कुछ हिस्सा राज्य सरकार का हो और बाकी टैक्सी चालको का। इससे सेलानियों को ज्यादा दिक्कत भी न होगी और सभी टैक्सी चालको को सामान्य रूप से काम मिलेगा और सरकार को इससे भी राजस्व की प्राप्ति होगी।
इसके अतिरिक्त एक अनुरोध और है कि कृपया माल रोड को पैदल चलने लायक बनाये न कि वाहनों की आवाजाही के लिए। ये अच्छी सुविधा है यहाँ कि रिक्शा के लिए लाइन लगती है पर हमें 1 घंटे तक लाइन में लगना पड़ा फिर भी रिक्शा नहीं मिला क्योंकि रिक्शे जाम में फंसे हुए थे।
शायद माल रोड के बनने का उद्येश्य ही झील की किनारे पैदल चलने का आनंद रहा होगा। मुझे नैनीताल की सारी अव्यस्थाओं का एक ही इलाज़ लगा और वो वाहनों की संख्या में कमी ही हो सकता है।
इस एक पहल से काफी कुछ सुधार सकता है, और शायद ये कोशिश करके आप सड़क पर खीझपूर्वक मुस्तेदी से ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों की खीझ और गुस्से से उत्पन मानसिक कष्ट को कम कर सके।
वैसे मुझसे पहले भी ऐसे सुझाव आपको बहुतों ने दिए होंगे और कुछ राजनीतिक अपने परायों के हठ ने आपको ऐसे सुधारों की तरफ बढ़ने से रोका होगा।
इसलिए आपसे मेरा विनम्र निवेदन है कि कृपया नैनीताल या उत्तराखंड में कहीं भी घूमने आने वाले सैलानियों की यात्रा को सुगम और यादगार बनाने की कृपा करें। जिससे सभी सैलानी यहाँ बार बार आना चाहें।
आपका शुभचिंतक व राज्य सरकार में अल्प वेतन भोगी
विजय रणवीर सिंह

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